साइबर अपराधियों का नया जाल: डर और लालच के जरिए लोगों को बना रहे शिकार, STF ने दी सतर्क रहने की सलाह

साइबर अपराधियों का नया जाल: डर और लालच के जरिए लोगों को बना रहे शिकार, STF ने दी सतर्क रहने की सलाह

Cybercriminals new trap

Cybercriminals' new trap

देहरादून। Cybercriminals' new trap, साइबर अपराधियों के पास अब हथियार नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक जाल है।

वे लोगों को कभी गिरफ्तारी, बैंक खाता बंद होने या केवाईसी निरस्त होने का डर दिखाते हैं तो कभी निवेश पर कई गुना मुनाफा, लाटरी, सरकारी योजना, सस्ते लोन और नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसा लेते हैं।

जैसे ही कोई व्यक्ति ओटीपी, यूपीआइ पिन, बैंक विवरण साझा करता है या स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है, कुछ ही मिनटों में उसकी मेहनत की कमाई बैंक खाते से गायब हो जाती है।

दैनिक जागरण के सोमवारीय अकादमिक विमर्श में 'बढ़ते साइबर अपराध की चुनौती' विषय पर एसटीएफ उत्तराखंड के अपर पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार ने कहा कि डिजिटल क्रांति के साथ साइबर अपराधियों की पहुंच भी हर घर तक हो गई है। मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग करने वाला हर व्यक्ति उनके निशाने पर है।

इसलिए किसी भी अनजान काल, लिंक, एप या निवेश प्रस्ताव पर बिना सत्यापन भरोसा करना भारी पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि अपराधी समय के साथ अपने तरीके बदलते रहते हैं।

आज डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस और सीबीआइ अधिकारी बनकर काल करना, शेयर बाजार और क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी, आनलाइन जाब आफर, कस्टमर केयर फ्राड, एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करना और क्यूआर कोड स्कैन कराकर बैंक खाते खाली करने के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं। इनसे बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता और सतर्कता है।

अपना खाता बेचना भी गंभीर अपराध

एएसपी ने लोगों को आगाह किया कि थोड़े से लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को किराये पर देना या बेचना गंभीर अपराध है। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, मनी लान्ड्रिंग और टैक्स चोरी में किया जाता है।

ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानून की नजर में आरोपित माना जाता है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है।

बुजुर्ग सबसे आसान निशाना, सतर्कता ही सुरक्षा

साइबर अपराधियों के निशाने पर सबसे अधिक वरिष्ठ नागरिक हैं। एएसपी विवेक कुमार ने बताया कि साइबर ठगी के 80 से 90 प्रतिशत मामलों में बुजुर्ग शिकार बन रहे हैं।

स्मार्टफोन और डिजिटल बैंकिंग की सीमित जानकारी का फायदा उठाकर ठग खुद को पुलिस, सीबीआइ, बैंक या सरकारी अधिकारी बताकर उन्हें डराते हैं।

कई मामलों में निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा दिया जाता है या एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक कर लिया जाता है। उन्होंने सलाह दी कि बुजुर्ग किसी भी अनजान काल पर घबराएं नहीं, पहले परिवार के सदस्य से बात करें।

बैंक, आरबीआइ, पुलिस, सीबीआइ या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर कभी ओटीपी, यूपीआइ पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करने से भी बचें।

ठगी होते ही ये पांच कदम उठाएं

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। एएसपी विवेक कुमार ने बताया कि पीड़ित सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर काल करें और तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देकर कार्ड, यूपीआइ या नेट बैंकिंग ब्लाक कराएं। ठगी से जुड़े स्क्रीनशाट, चैट, ट्रांजेक्शन आइडी, मोबाइल नंबर और लिंक सुरक्षित रखें तथा नजदीकी साइबर थाने में एफआइआर दर्ज कराएं।

समय पर कार्रवाई होने पर ठगी की रकम संबंधित खाते में होल्ड कराई जा सकती है और उसे वापस मिलने की उम्मीद काफी बढ़ जाती है।

ऐसे सुरक्षित रखें अपना वाट्सएप

  • पहला कदम: टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर चालू करें। वाट्सएप की सेटिंग में जाएं। अकाउंट टू-स्टेप वेरिफिकेशन पर क्लिक करें। छह अंकों का मजबूत पिन बनाएं और ई-मेल भी जोड़ दें। इससे सिम क्लोनिंग या ओटीपी मिलने पर भी आपका अकाउंट सुरक्षित रहेगा।
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  • दूसरा कदम: प्राइवेसी सेटिंग मजबूत करें। सेटिंग से प्राइवेसी में जाएं। लास्ट सीन, आनलाइन, प्रोफाइल फोटो, अबाउट और स्टेटस को 'माय कान्टैक्ट्स' तक सीमित रखें। अनजान लोगों को अपनी निजी जानकारी न दिखने दें।
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  • तीसरा कदम: एडवांस सुरक्षा सुविधाएं चालू करें। सेटिंग से प्राइवेसी एडवांस में जाएं। ब्लाक मैसेज फ्राम अननोन अकाउंट्स चालू करें। प्रोटेक्ट आइपी एड्रेस इन काल्स आन करें। डिसेबल लिंक प्रीव्यू चालू रखें, ताकि संदिग्ध लिंक से जोखिम कम हो।

अगर साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत ये करें

  • सबसे पहले 1930 हेल्पलाइन पर काल करें।
  • cybercrime.gov.in पर तुरंत आनलाइन शिकायत दर्ज करें।
  • संबंधित बैंक को तुरंत सूचना देकर खाता, यूपीआइ या कार्ड ब्लाक कराएं।
  • ठगी से जुड़े स्क्रीनशाट, चैट, ट्रांजेक्शन आइडी, मोबाइल नंबर और लिंक सुरक्षित रखें।
  • किसी भी मैसेज या चैट को डिलीट न करें, यही जांच में अहम साक्ष्य बनते हैं।
  • नजदीकी साइबर थाना या पुलिस स्टेशन में एफआइआर दर्ज कराएं।
  • जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, रकम होल्ड होकर वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी।